वो इस तरह से हुआ रूठ कर रिहा मुझ सेे
कि जैसे रूठ गई हो कोई दु'आ मुझ सेे
किसी के इश्क़ ने इसको किया खफा मुझ सेे
मिरा ही अक्स रहा मुद्दतों जुदा मुझ सेे
मैं यूँं तो देखता फिरता हूँ ज़ख़्म दुनिया के
मगर मिरा ही कोई ज़ख़्म ना दिखा मुझ सेे
मैं चाहता था सभी साथ में चलें लेकिन
निकल चुका था बहुत दूर कारवां मुझ सेे
वो मिल रहा था मुझे आख़िरी दफा हँसके
उसे पता था हो रहा है वो रिहा मुझ सेे
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