vo is tarah se hua rooth kar rihaa mujhse | वो इस तरह से हुआ रूठ कर रिहा मुझ सेे

  - Aditya

वो इस तरह से हुआ रूठ कर रिहा मुझ सेे
कि जैसे रूठ गई हो कोई दु'आ मुझ सेे

किसी के इश्क़ ने इसको किया खफा मुझ सेे
मिरा ही अक्स रहा मुद्दतों जुदा मुझ सेे

मैं यूँं तो देखता फिरता हूँ ज़ख़्म दुनिया के
मगर मिरा ही कोई ज़ख़्म ना दिखा मुझ सेे

मैं चाहता था सभी साथ में चलें लेकिन
निकल चुका था बहुत दूर कारवां मुझ सेे

वो मिल रहा था मुझे आख़िरी दफा हँसके
उसे पता था हो रहा है वो रिहा मुझ सेे

  - Aditya

Rahbar Shayari

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