chaar din chaandni aur bas | चार दिन चांदनी और बस

  - Aditya

चार दिन चांदनी और बस
स्याह फिर ज़िन्दगी और बस

दो बजे रोए हम और फिर
हमको नींद आ गई और बस

इक दिया जोर से जल उठा
गुम गई रौशनी और बस

ख़्वाब तेरे चुभे पहले तो
आँख अश्क से धुली और बस

वो किसी और की हो गई
मर गई आशिक़ी और बस

सांस कम आ रही थी मुझे
फिर हवा भी थमी और बस

अब नहीं रोऊँगा सोचा था
वो मुझे फिर दिखी और बस

वो मेरे साथ में ख़ुश तो थी
भर गया उसका जी और बस

  - Aditya

Nature Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Aditya

As you were reading Shayari by Aditya

Similar Writers

our suggestion based on Aditya

Similar Moods

As you were reading Nature Shayari Shayari