कि अब तलक उसे मेरा ख़याल है कमाल है
किए पे उसके उसको अब मलाल है कमाल है
तेरे बदन को छूते ही मेरी नज़र महक उठी
तेरा बदन बदन नहीं गुलाल है कमाल है
बड़ी अजीब बेख़ुदी दिमाग पर सवार है
उसे नहीं पता जो मेरा हाल है कमाल है
कबूतरों ने एक ख़त कहीं से ला मुझे दिया
अरे ये ख़त नहीं तेरा रुमाल है कमाल है
मेरी लिखी ग़ज़ल अगर पढ़ेंगे तेरे यार तो
कहेंगे सब के सब यही कमाल है कमाल है
तुम्हें कि जिस सेे इश्क़ था कहाँ है अब वो कौन है
ज़ुबाँ पे सबके बस यही सवाल है कमाल है
जिन्हें लगा मुहब्बतों में कुछ नहीं है वो सुने
मोहब्बतों में हिज्र है विसाल है कमाल है
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