बात करता है तो अक्सर वो ख़फ़ा लगता है
उसका अंदाज़ मगर सब सेे जुदा लगता है
वो महज़ देख ले हँस के तो दु'आ लगता है
उसका अहसास मुझे लम्स-ए-सबा लगता है
उसकी यादों से महक ऐसी उठा करती है
मुझको फूलों की तरह मुझ
में खिला लगता है
बस उसे देख के ही मुझको सुकूँ मिलता है
ये ख़बर मुझको नहीं क्या वो मिरा लगता है
ख़ुशनुमा ऐसा कि दुश्मन भी मोहब्बत कर लें
मुझको सचमुच वो मोहब्बत का ख़ुदा लगता है
अनकहे लफ्ज़ भी आँखों से सुने हैं उसके
वो जो कहता ही नहीं वो भी कहा लगता है
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