साथ ता-उम्र अपना होना होख़्वाब साकार ये सलोना होचाहूँ ज़्यादा न बस तिरे दिल मेंछोटा सा इक मिरा भी कोना होटूट के बिखरूँ तो सुकूँ मेरातेरी ही बाँहों का बिछौना होखोए इक दूजे में रहे हम तुमहोता हो फिर हो जो भी होना होबिखरे चेहरे की आभा भी हर सूहो मसर्रत न कोई रोना हो— Abha sethi