कितनों की नींदें ले गई पाज़ेब ये जी आप कीमख़मल पे चाँदी की ज़री पाज़ेब ये जी आप कीपल पल खनकती बातें करती है लगे जैसे कि होचंचल सी बातूनी सखी पाज़ेब ये जी आप की— Abha sethi