अबकी बरस भी वो नहीं आया बहार में

गुज़रेगा और एक बरस इंतिज़ार में

ये आग इश्क़ की है बुझाने से क्या बुझे
दिल तेरे बस में है न मेरे इख़्तियार में

है टूटे दिल में तेरी मुहब्बत तेरा ख़याल
ख़ुश रंग है बहार जो गुज़ारी बहार में

आँसू नहीं है आँखों में लेकिन तेरे बगैर
वो काँपते हुए हैं दिल-ए- बे-क़रार में

— Ajay lakhnavi

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