बना न पाए कोई इस तरह बनाना है
बतौर-ए-ख़ास हमें आइना बनाना है
हमारी दोस्ती उस ने क़ुबूल कर ली है
अब उस के दिल की तरफ़ रास्ता बनाना है
ये हम से पूछ रहे हैं ज़माने वाले, क्यूँ?
सुकून बेच दिया, ऐसा क्या बनाना है?
छुपा के लाया हूँ तस्वीर हुस्न-ए-जानाँ की
अब उस के वास्ते इक बुत-कदा बनाना है
भटक न जाएँ ये इंसानियत के रस्ते से
सो नस्ल-ए-नौ के लिए नक़्श-ए-पा बनाना है
— Akash Rajpoot















