“नैरंतर्य”
मृत्यु शय्या दिख रही हो
फिर भी न होना विकल
जिस मार्ग पर तुम चल दिए
उस मार्ग पर रहना अटल
क्या पराजय ? क्या विजय ?
ये सीढ़ियाँ हैं सीढ़ियाँ
जो मिले स्वीकार कर
बढ़ता ही चल बढ़ता ही चल
उस धार का कर अनुसरण
और मध्य में गोते भी खा
उस खग नयन को भेद दे
होगा सफल होगा सफल
— Aqib khan















