“तमाशा “
अब बने हो कठपुतली तो तुम्हें समझ आया
हर तरफ़ निराशा है ज़िंदगी तमाशा है
पहली बार उतरें तो हम सभी को लगता है
खेल ये नया सा है
वक़्त रहते जानोगे तुम नए हो मैदाँ में
खेल ये पुराना है
ये कोई खुलासा है ज़िंदगी तमाशा है
बात ये पुरानी है हर किसी ने जानी है
ज़िंदगी तमाशा है ज़िंदगी तमाशा है
— Aqib khan















