लिख रहा हूँ मैं ऐसी चिट्ठियाँ मोहब्बत में
जैसे मुझ को मिलनी हों डिग्रियाँ मोहब्बत में
हैं बड़ी ही अद्भुत सी शक्तियाँ मोहब्बत में
शे'र बन के बैठी हैं बकरियाँ मोहब्बत में
याद जो किसी को भी एक पल न करता था
आ रही हैं उस को भी हिचकियाँ मोहब्बत में
इतनी प्यारी मुस्की को और बढ़ती धड़कन को
देख कर के लगता है हैं मियाँ मोहब्बत में
कॉल तेरी आते ही फूल खिलने लगते हैं
और उड़ने लगती हैं तितलियाँ मोहब्बत में
— Alankrat Srivastava















