उन्हें दरिया कभी चंदा कभी संसार दिखता है
मैं आशिक़ हूँ मुझे आँखों में केवल प्यार दिखता है
बड़ी उलझन में हूँ यारों कि मुझको उनकी बातों में
कभी इनकार दिखता है कभी इक़रार दिखता है
मेरे अंदर का इक बच्चा जो महफ़िल को हँसाता है
न जाने आइने में क्यूँ वही बेज़ार दिखता है
उसी को ढ़ूँढ़ने में मेरी सारी 'उम्र गुज़री है
वो चेहरा जो मेरे सपनों में बारम्बार दिखता है
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