सुर नहीं कहीं भी ऐसे कोई भी सितार मेंसुर जो बोली में है तेरी है तेरी पुकार मेंमंदिरों में मस्जिदों में बन नहीं सके मगरआदमी बने हैं आदमी पड़े जो प्यार में— Alankrat Srivastava