मुझे अपना तो होना चाहिए था उम्र भर शायद

नहीं हो पाया अपना या किसी का उम्र भर शायद

मुझे ये दर्द जीने ही न दे पाएगा ग़म ये है
मुझे लगता है मैं यूँ ही रहूँगा उम्र भर शायद

यहाँ पर कोई अब पहचानता होगा कहा मुझ को
मैं भी ख़ुद को ही पागल ख़ुद रखूँगा उम्र भर शायद

मैं हूँ गुम-सुम भी तन्हा भी उदासी का सताया हूँ
परेशाँ ही रहूँगा बेसहारा उम्र भर शायद

कहीं मैं हार ही जाऊँ न ख़ुद से भी लड़ाई ये
ये माना हाँ मैं दुनिया से हूँ हारा उम्र भर शायद

— Amaan Ali

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