ये अब तेरे दर पर नहीं आने वाले
इन्हें जाने दे ये थे ही जाने वाले
बहुत ही खटकता है इन लोगों को तू
ये जो लोग हैं अपने कहलाने वाले
तेरा तो मैं अपना था मुझ से भी ऐसा
ये अलफ़ाज़ थे तेरे समझाने वाले
मैं तो सब्र कर भी गया था मगर अब
मैं भी हूँ उन्हीं में जो थे जाने वाले
मैं बचता हुआ फिर रहा अपनों से ही
ये इंसाॅं है इंसाॅं को ही खाने वाले
— Amaan Ali















