हवा में उड़ के न जाओ दयार अपना है
तुम्हें जो ढूँढ़ ले ऐसा रडार अपना है
जो मन के तार से स्वर चाहतों का भर देगा
तुम्हारी बज़्म का महँगा सितार अपना है
न आई नींद मुझे और न चैन है दिल को
मिलन के वास्ते ये इंतजार अपना है
पढा जो उनकी नज़र को तो ये लगा मुझको
वो जैसे कह रही हों ये शिकार अपना है
न होश ख़ुद का न गैरों की फ़िक्र है साक़ी
तुम्हारे 'इश्क़ में चढ़ता ख़ुमार अपना है
ज़माना लाख बुरा चाहे फ़र्क़ क्या पड़ना
सनम के प्यार पे जब ऐतबार अपना है
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