main usko apna sab kuchh maanta tha | मैं उसको अपना सब कुछ मानता था

  - Mohd Arham

मैं उसको अपना सब कुछ मानता था
मेरा होना भी जिसका मसअला था

मोहब्बत ख़त्म होने जा रही थी
वो मेरे साथ अब उकता रहा था

मेरी चीखें भी सुन के वो न लौटा
जो आहट तक मेरी पहचानता था

रवानी ख़ून की कम हो चुकी थी
गले मिलना ज़रूरी हो गया था

वो मुद्दत बाद मुझसे मिल रही थी
मैं उसको देखते ही रो पड़ा था

मेरे सब ज़ख़्म यूँँ तो भर चुके थे
मगर वो मुझ
में अब भी रह गया था

गँवा के 'उम्र अपनी सारी 'अरहम'
दुआ मरने की अब मैं कर रहा था

  - Mohd Arham

Aawargi Shayari

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