अब इस
में मिलने न मिलने का कोई रंग नहीं
ये पाक साफ़ मोहब्बत है कोई जंग नहीं
ख़ुशी अहम थी सो हँसता हूँ चीख़ चीख़ के मैं
तो क्या हुआ कि अकेला हूँ उस के संग नहीं
सुना था पहले ही अंजाम ए इश्क़ लोगों से
सो अपने हाल पे मायूस तो हूँ दंग नहीं
ये किसपे ख़र्च किया अपनी ज़िंदगी अरमान
वो जिस को बात भी करने का ढंग वंग नहीं
— Armaan khan















