शहर की भीड़,चकाचौंध से उकताए हुएऐसे उकताए हुए लोग कहाँ जीते हैंमुझ से मत पूछ,मेरी आँख का सूनापन देखतेरे ठुकराए हुए लोग कहाँ जीते हैं— Armaan khan