नहीं है गर तुम्हारा,तो बताओ यार, किस का है?
अगर अच्छा तुम्हारा था, तो फिर बद-कार किस का है?
तुम्हारा जान कर, अपना समझ कर, चूम लेता हूँ
मुझे क्या है, ये लब किस के हैं, ये रुख़्सार किस का है?
ख़ुदा ने सब बनाया है, ये सब दुनिया ख़ुदा की है
जहाँ से ख़ुद-कुशी होती है, वो कोहसार किस का है?
कहीं लगता नहीं है दिल कि घर हो या हो वीराना
हमारे सर पे ना जाने जो है, आज़ार किस का है?
लिखा है मेरी ख़ातिर कह, सुनाता है मेरे नग्में
सितम ये है, बताता वो नहीं, अश'आर किस का है?
— Ashutosh Kumar "Baagi"















