ग़ज़ल कैसे में कह पाता, मुहब्बत की नहीं उस नेगले कैसे मैं लग जाता, इजाज़त दी नहीं उस नेमैं ये दिल दे के आया ख़ूब-सूरत उस हसीना कोभले बेचैन के दिल की हिफ़ाज़त की नहीं उस ने— Sarthak Bechen