रात काली है तो क्या हैचाँद की ही बद-दुआ हैइश्क़ ये कब था सुकूँ जोइश्क़ अब बेदिल सज़ा हैतुम अकेले हो मगर वोभीड़ में तन्हा हुआ हैमेरे दिल के जैसा ही हैटूटा फूटा घर बना हैजुर्म दिल के माफ़ हैं सबबस तवक़्क़ो ही मना हैपूछो कुछ बेबार उस सेझूठा है लेकिन ख़ुदा है— Beybaar