रीडिंग फ़ॉर ए ब्लाईंड चाइल्ड
इन घुप्प अँधेरी गलियों में
रौशन सी सदायें बहने दो
बस आवाज़ों की उँगली पकड़
मुझे इस जंगल में रहने दो
शे'रू कैसे दहाड़ा, झरना क्या बोला
चाँद ने फिर क्या नाक सिकोड़ी ;
ख़ामोश नज़ारे हैं ये सब
पलकों पे उजाले दुखते हैं,
'फूल' पढ़ूँ गर ब्रेल में तो
वो पोटुओं में चुभते हैं
तुम आँखों पे आवाज़ें रख दो
फिर पुस्तक को कहने दो
इन घुप्प अँधेरी गलियों में
रौशन सी सदायें बहने दो ।
— Beybaar















