उम्र कट जाती है पर ये न भरा करते हैं
ज़ख़्म इस दिल में कुछ ऐसे भी हुआ करते हैं
हम ने जो कुछ भी किया आप की ख़ातिर ही किया
आप जो करते हैं वो बहर-ए-ख़ुदा करते हैं
आपसे मिल के ये मालूम हुआ है मुझ को
अब भी कुछ लोग मुहब्बत में वफ़ा करते हैं
काम सब छोड़ के आओ मेरे यारों हम तुम
इस उदासी का सबब क्या है पता करते हैं
इस वजह से भी हमें नींद नहीं आती है
ख़्वाब टूटे हुए आँखों में चुभा करते हैं
मैं तेरे शहर में आया तो ये जाना मैं ने
एक बाज़ार में रिश्ते भी बिका करते हैं
अपने घर की भी हिफ़ाज़त नहीं कर पाए ‘अभी’
बस इसी बात का अफ़सोस किया करते हैं
— Abhishek Bhadauria 'Abhi'















