
हर कहीं से आती है मेरे यार की ख़ुश्बू
कब न जाने जाएगी उस के प्यार की ख़ुश्बू
लाख पहरे लग जाते मेरे दिल पे हैं फिर भी
हर ग़ज़ल में बसती उस ना–गवार की ख़ुश्बू
— Swapnil Srivastava 'Bhola Lucknowi'
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