मेरे बटुए में खालीपन है जब से
मुझ से अपनों ने दूरी की है तब से
इतने दुख क्यूँ आए हैं मेरे हिस्से
बेहद मन करता है मैं पूछूँ रब से
उस दिन से चैन नहीं आया है मुझ को
टूटे देखे हैं अपने सपने जब से
जो गर्दन में फंदा डाले बैठी हूँ
मैं ने ऐसी नादानी सीखी कब से
दुनिया चालाकी में जितनी अव्वल है
उस से लगता है मैं पिछड़ी हूँ सब से
जिन लोगों ने बे-दर्दी से कुचला है
तुम उन से ज़्यादा दूरी रक्खो अब से
— Bhoomi Srivastava















