मेरे बटुए में खालीपन है जब से
मुझ सेे अपनों ने दूरी की है तब से
इतने दुख क्यूँ आए हैं मेरे हिस्से
बेहद मन करता है मैं पूछूँ रब से
उस दिन से चैन नहीं आया है मुझको
टूटे देखे हैं अपने सपने जब से
जो गर्दन में फंदा डाले बैठी हूँ
मैंने ऐसी नादानी सीखी कब से
दुनिया चालाकी में जितनी अव्वल है
उस सेे लगता है मैं पिछड़ी हूँ सब से
जिन लोगों ने बेदर्दी से कुचला है
तुम उन सेे ज़्यादा दूरी रक्खो अब से
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