साथ रहने के ख़्वाब देता है
झूठ को क्यूँ नक़ाब देता है
डाइरी कैसे भर लूँ अपनी मैं
कब तू मुझ को गुलाब देता है
शोर होता है दिल में जब मुझ को
तू नहीं कुछ जवाब देता है
कम पढ़ी लग रही हूँ तुझ को क्या
तोहफ़े में जो किताब देता है
वस्ल करना नहीं है तुझ को क्यूँ
फालतू के हिसाब देता है
— Bhoomi Srivastava















