शहर में जाने कैसे रहते हो
बारहा गाँव आते रहते हो
आप के बा'द रहना मुश्किल है
ऐसे क्यूँ साथ मेरे रहते हो
इक वो जो बात साफ़ दिखती है
इक जो आँखों से कहते रहते हो
अब नए तौर का उजाला है
तुम हो लपटों में जलते रहते हो
मान कर अपना उस के लोगों को
सच कहो तन्हा कितने रहते हो
उस से तुम बात क्यूँ नहीं करते
जिस की तुम बातें करते रहते हो
— Chetan















