Chetan
Chetan
Ghazal

तुझ को लगता अबस ख़सारा है

ये मेरा आख़िरी तमाशा है
इश्क़ से जो नज़र चुराते हैं
जानते हैं हमें हुआ क्या है

इस जनम में ही हम मिले थे क्या
भूलना हिज्र में क़ज़ा सा है

दुख है तेरे बग़ैर जीना भी
जान लेने में मेरी हारा है

— Chetan

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