बिना तेरे इक दिन गुज़ारा नहीं है
सो तुझ से बिछड़ना गवारा नहीं है
तुम्हें उस की आँखें अगर झील है दोस्त
रहे इल्म इस का किनारा नहीं है
यही कह के नुक़्ता चीं को टाल देना
ये ज़र्रा है कोई सितारा नहीं है
उसे पाने की कोशिशें राएगाँ हैं
उसे छोड़ दो जो तुम्हारा नहीं है
मुहब्बत हो या ज़िन्दगी की अज़िय्यत
मेरे यार 'साहिल' तू हारा नहीं है
— Divyanshu Tiwari SAHIL















