chaand din men aur suraj raat men aaya hai yaar | चाँद दिन में और सूरज रात में आया है यार

  - "Dharam" Barot

चाँद दिन में और सूरज रात में आया है यार
तेरी हर इक बात पर ऐसे ही हाँ बोला है यार

दोस्त के दुश्मन को अपना भी बना लेता है यार
मतलबी औक़ात ऐसे ही दिखा देता है यार

शायरी का इक इशारा सब तरफ़ ही काफ़ी था
नाम सबका लो ज़रूरी भी नहीं होता है यार

मैंने ग़लती को छुपाने ये बहाना ढूँढा था
रूह को भी जिस्म का ही पार्ट सा माना है यार

हर अकेले को पता होता है कोई साथ है
साथ कोई गर न हो फिर जिस्म मर जाता है यार

  - "Dharam" Barot

Bhai Shayari

Our suggestion based on your choice

More by "Dharam" Barot

As you were reading Shayari by "Dharam" Barot

Similar Writers

our suggestion based on "Dharam" Barot

Similar Moods

As you were reading Bhai Shayari Shayari