मोहब्बत के सारे नियम तोड़ देंगे
अगर वो हमारी क़सम तोड़ देंगे
बस इतना कहेंगे तअल्लुक़ तमाम और
सज़ा ये सुना कर क़लम तोड़ देंगे
जो वहदत न हम तोड़ पाएँगे इन की
तो फिर इन के दैर ओ हरम तोड़ देंगे
वो नूर आ गया जो कभी महफ़िलों में
ये सारे चराग़ अपना दम तोड़ देंगे
उन्हें मान बैठे ग़रज़ से ज़ियादा
हमें ख़ुद हमारे करम तोड़ देंगे
— Divyansh "Dard" Akbarabadi















