जब भी मेरे शहर तुम आना मिरी जानाँतो गले लग कर मिरे जाना मिरी जानाँआज मैं भी हूँ तुम्हारी याद भी है औरख़ूब है मौसम भी मस्ताना मिरी जानाँ— Prakamyan Gautam