ले न जाए मिरी जाँ, यार उदासी
चाहता कौन है हर बार उदासी
दिल किसी से न लगा बा'द तिरे अब
खा गई हम को,ये बेकार उदासी
ख़्वाब में भी न गया दूर तू हम से
अब नहीं और है दरकार उदासी
इस लिए फूल भी अब हो गए हैं ज़र्द
पेड़ को कर गई बीमार उदासी
मैं उसे कैसे कहूँ प्यार है तुम से
करने देती नहीं इज़हार उदासी
— Govind kumar















