वक़्त रो रो के ही बिताना है
ये कमाना भी क्या कमाना है
जितना हम हैं दुखी ज़माने से
उतना हम से दुखी ज़माना है
अब ग़ुलामी नहीं करेंगे हम
दिल सता ले अगर सताना है
ज़िन्दगी की थकान सर पे है
दूर अपना कहीं ठिकाना है
— Govind kumar
ये कमाना भी क्या कमाना है
जितना हम हैं दुखी ज़माने से
उतना हम से दुखी ज़माना है
अब ग़ुलामी नहीं करेंगे हम
दिल सता ले अगर सताना है
ज़िन्दगी की थकान सर पे है
दूर अपना कहीं ठिकाना है
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