वो जो छुप-छुप के सनम बात किया करता थाजाग कर साथ मिरे रात किया करता थाजो नज़र तक न मिलाता था वो मिलने पर भीख़्वाबों में मुझ से मुलाक़ात किया करता थातू भी मायूस है दुनिया की परेशानी सेठीक था तू जो सवालात किया करता था— Gulshan Panwar