तुम्हारे बा'द ये हम पर खुला है

तुम्हारी याद अब आबो हवा है

अभी से ज़ीस्त से घबरा गए तुम
अभी तो एक ही ओवर हुआ है

गुज़रते वक़्त से ये कह रहे हम
गुज़र जाने में ही सबका भला है

हमारा हाल तो जाइज़ है लेकिन
तुम्हारा हाल क्यूँ ऐसा हुआ है

तुम्हारे वास्ते जो ग़म रहा है
हमारे वास्ते वो तजरबा है

हम ऐसे तो किसी के क्या ही होंगे
हम ऐसों का तो होना हादसा है

ये आँखें तो कभी ऐसी नहीं थी
मियाँ छोड़ो ये ज़ाती मसअला है

— Shriyansh Qaabiz

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