जितना भी ग़म था हम सेे भुलाया नहीं गया
कोशिश किया पा दिल को हँसाया नहीं गया
शहर-ए-सितम ने हमको दिए ज़ख़्म हैं बहुत
ज़ख़्मों को अपने हम सेे दिखाया नहीं गया
इस तरह से हमारी नज़र में वो गिर गया
नज़रों में फिर से हम सेे उठाया नहीं गया
माना नहीं है ख़ुश के अगर दिख रहे हैं हम
ऐसा नहीं के हमको सताया नहीं गया
चाहा बहुत सुनाए हमारी भी दास्ताँ
पर दास्ताँ का दर्द सुनाया नहीं गया
हम मर गए बरोज़-ए-जुदाई-ए-जान-ए-दिल
हिजरत का दर्द हम सेे उठाया नहीं गया
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