वो मेरी नींद तो मैं उसका ख़्वाब बन जाऊँ
मैं उसके लम्हों की पूरी किताब बन जाऊँ
ख़ुदाया मुझको नसीब ऐसा कोई रोज़ भी हो
अगर वो प्यासी रहे तो मैं आब बन जाऊँ
वो इक सवाल है जिसका कोई जवाब नहीं
मगर हो क्या ही जो उसका जवाब बन जाऊँ
है एक शम्मा जो जलती है सुर्ख़ सूरज सी
मैं उसका मोम बनूँ उसका ताब बन जाऊँ
वो मयकदे में जो आए तो काश ऐसा हो
मैं उसके जाम की छलकी शराब बन जाऊँ
लिबास अपने बदन पर हया का रखती है
जड़ा लिबास में हीरा नयाब बन जाऊँ
वो इक फ़लक है समेटे हुए सितारों को
मैं उस फ़लक का कोई माहताब बन जाऊँ
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