ख़्वाहिशें चूर होती जाती है
हर ख़ुशी दूर होती जाती है
दिन गुज़रता है जैसे तैसे पर
रात नासूर होती जाती है
शख़्स वो दूर हो गया जब से
ऑंखें बे-नूर होती जाती है
बात इक बार तू नें जो कह दी
वो ही दस्तूर होती जाती है
साल दर साल ऐसा लगता है
ज़िन्दगी दूर होती जाती है
मेरी मन्नत सभी हुई ख़ारिज
उस की मंज़ूर होती जाती है
शे'र पर दाद जब नहीं मिलती
शा'इरी चूर होती जाती है
— jaani Aggarwal taak














