इस ज़माने को आज़माने दो
जान जाती अगर तो जाने दो
हो चुका है तबाह घर मेरा
कम से कम शोक तो मनाने दो
मेरी आँखों का पानी सूख चुका
फिर किसी से ये दिल लगाने दो
मर्द का फर्ज़ सिर्फ़ इतना है
ग़मज़दा लड़कियों को शाने दो
जौन के शे'र पढ़ने दो मुझ को
ग़म भरा गीत गुनगुनाने दो
हाल जब पूछता कोई मेरा
क्या कहूँ ख़ैर छोड़ो जाने दो
— jaani Aggarwal taak














