सर उठा कर जहान देखते हैं
हम जो यूँ आसमान देखते हैं
शे'र कहता हूँ दाद तुम देना
किस में कितनी है जान देखते हैं
हम सितारों की छाँव में अक्सर
लेट कर आसमान देखते हैं
— jaani Aggarwal taak
हम जो यूँ आसमान देखते हैं
शे'र कहता हूँ दाद तुम देना
किस में कितनी है जान देखते हैं
हम सितारों की छाँव में अक्सर
लेट कर आसमान देखते हैं
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