ज़ब्त-ए-औक़ात भी औक़ात में आ जाता हैबात उस की हो तो दिल बात में आ जाता हैमौसम-ए-गुल भी बहाना है नहीं आने कोआने वाला भरी बरसात में आ जाता है— Janib Vishal