dil se shor nikala jaa.e | दिल से शोर निकाला जाए

  - Meem Alif Shaz

दिल से शोर निकाला जाए
ख़ामोशी को लाया जाए

झूठ से तो सब मुश्किल में हैं
सच का दामन पकड़ा जाए

नाइंसाफ़ी फैल रही है
हिम्मत से कुछ बोला जाए

तुम जिस शख़्स के भी घर जाओ
उस को घर पे बुलाया जाए

कुर्सी वाले सब सुनते हैं
मुँह पे ताला डाला जाए

जो नफ़रत को भुलाना चाहे
उस से हाथ मिलाया जाए

जिस्म के नखरे देख रहा हूँ
रूह से रिश्ता जोड़ा जाए

क़ब्र बुलाने वाली है 'शाज़'
बोरिया बिस्तर बाँधा जाए

  - Meem Alif Shaz

Bahan Shayari

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