
जो बावफ़ा नहीं, वफ़ा का उस से भी सवाल क्या
उसे तो कुछ पता नहीं हराम क्या हलाल क्या
परिंदों के परों को काटे है जो ज़ात के लिए
उसे तो कुछ पता नहीं ख़ुदा का है जलाल क्या
जो काट दे जवानी अपनी बस बुरे ही कामों में
उसे तो कुछ पता नहीं ये हुस्न का कमाल क्या
— Meem Alif Shaz















