तेरी इन्हीं ग़ज़लों से मेरी रोज़गारी चलती हैगर छोड़ दूँ लिखना तो जैसे बे-क़रारी चलती हैये इश्क़ भी तो वक़्त के पीछे ग़ुलामी ही करे'काफ़िर' यहाँ दौलत नहीं चलती उधारी चलती है— Kaffir