निगाहें उठा कर सितमगर
चलाता है ख़ंजर सितमगर
यक़ीनन हवा-ए-अना से
कटेंगे तेरे पर सितमगर
ये दिल इक जफ़ा-ए-ख़ला है
यही है तेरा घर सितमगर
हमें आदत-ए-इंतिहा है
नहीं है हमें डर सितमगर
हवा की हदों से उतर जा
उखड़ते हैं शहपर सितमगर
किसे आरज़ू-ए-जफ़ा थी
था किस को मुयस्सर सितमगर
पिला दे सितम का वो तिर्याक
गिलासों में भर कर सितमगर
— Kaif Uddin Khan















