आग लगाकर शाम सुहानी नइँ करनी
हम को उन की आँखें पानी नइँ करनी
उन के साथ में ख़ुद पर क़ाबू रखना है
कोई भी हरकत जिस्मानी नइँ करनी
रोज़ हमारी जितनी बातें होती हैं
कल से उन से नैन मिलानी नइँ करनी
आधी रात में हम को ये एहसास हुआ
घर की इतनी भी निगरानी नइँ करनी
— Aashish kargeti 'Kash'















