कहता है कि सच्चे मन से मेरे तन को छूएगा
पानी भरना है गगरी में उस बरतन को छूएगा
बातें वातें करते करते इक दम मैंने पूछा जब
यार बताओ प्यार हमारा किस बंधन को छूएगा
वापिस से फिर बोला उसने जोड़ी बनकर आती है
माँग भरेगा पहले मेरी फिर गर्दन को छूएगा
जान रही थी रफ्ता रफ्ता रफ्ता रफ्ता खत्म हुआ
'इश्क़ हमारा अर्थी पर है अब चंदन को छूएगा
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