kitna anjaan tha is kaam se pahle pahle | कितना अंजान था इस काम से पहले पहले

  - Khalid Azad

कितना अंजान था इस काम से पहले पहले
मैं था गुमनाम तेरे दाम से पहले पहले

अब तो हम देख उसे राह बदल लेते हैं
था जो मशहूर मेरे नाम से पहले पहले

उसको आगाज़-ए-सफ़र से ही पशेमां देखा
वो पलट आएगा अंजाम से पहले पहले

ऐ परिंदों कभी रातों का भरोसा न करो
तुम तो घर लौट चलो शाम से पहले पहले

मैं तुम्हें सोच के तन्हाई में रो लेता हूँ
ये मेरा काम है बस जाम से पहले पहले

कितनी मुश्किल से तेरे दिल में उतर पाया हूँ
इक निशां तक भी नहीं गाम से पहले पहले

रात गुज़री तो कहीं चैन मिला है मुझको
कितना बेचैन था इल्हाम से पहले पहले

  - Khalid Azad

Andhera Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Khalid Azad

As you were reading Shayari by Khalid Azad

Similar Writers

our suggestion based on Khalid Azad

Similar Moods

As you were reading Andhera Shayari Shayari